उदयपुर। सोशल मीडिया पर किसी के काम या राय पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार हो सकता है, लेकिन जब यह असहमति लगातार अपमान, चरित्र हनन और संगठित ट्रोलिंग में तब्दील हो जाए, तो वह 'साइबर बुलिंग' का खतरनाक रूप ले लेती है। हाल ही में चेन्नई के 27 वर्षीय फाइनेंस इन्फ्लुएंसर वी. हरीश की आत्महत्या ने पूरे देश को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वर्चुअल दुनिया में आलोचना करते समय लोग किस तरह मानवीय सीमाएं लांघ रहे हैं। हमारा बढ़ता शहर तेजी से कोचिंग, उच्च शिक्षा और डिजिटल क्रिएटर्स का हब बन रहा है, यहां भी वर्चुअल स्पेस का यह काला सच युवाओं की मानसिक सेहत को खोखला कर रहा है। स्कूल-कॉलेज के छात्रों से लेकर स्वतंत्र राय रखने वाले युवा अक्सर व्हाट्सएप ग्रुप, इंस्टाग्राम और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर टारगेटेड हैरासमेंट का शिकार बन रहे हैं।
विरोध और प्रताड़ना में फर्क समझना जरूरी
हर तीखी टिप्पणी साइबर बुलिंग और हर असहमति अपराध नहीं है। आलोचना का अर्थ है किसी की राय, दावों या काम में कमियों पर तथ्यों के साथ सवाल खड़े करना। दूसरी ओर जब किसी को झुकाने या डराने के लिए लगातार अपशब्द लिखे जाएं, निजी जानकारी सार्वजनिक की जाए, फेक प्रोफाइल से बदनाम किया जाए या ब्लैकमेल कर वसूली की कोशिश हो तो यह सीधे तौर पर साइबर बुलिंग है।
व्यवहार में बदलाव दिखें तो साधें संवाद
ऑनलाइन प्रताड़ना का शिकार होने पर बच्चों और युवाओं में तेजी से व्यवहारगत बदलाव आते हैं। वे अचानक गुमसुम रहने लगते हैं, चिड़चिड़ापन बढ़ता है, पढ़ाई या काम से ध्यान भटकता है और वे कमरे में खुद को कैद करने लगते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे समय में अभिभावकों को बच्चे पर गुस्सा होने या मोबाइल छीनने के बजाय दोस्ताना माहौल में बात सुननी चाहिए, ताकि वे डर के मारे परेशानी छिपाए नहीं।
कानून सख्त: केवल एक शिकायत नहीं, तय हैं कड़ी धाराएं
साइबर बुलिंग से निपटने के लिए अलग से विशिष्ट कानून न होने पर भी भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट के कई प्रावधान है। आपराधिक धमकी देने पर बीएनएस धारा 351 लगती है। सोशल मीडिया पर सार्वजनिक मानहानि करने पर बीएनएस की धारा 356 लगती है। महिला से साइबर स्टॉकिंग, पीछा करने, फब्तियां कसने पर बीएनएस की धारा 75, 78 व 79 लगाई जाती है। फर्जी आईडी बनाकर आपत्तीजनक कंटेंट प्रसारित करने पर आईटी एक्ट की धारा 66 सी, 66 डी व 67/67 ए लगाई जाती है। ब्लैकमेल कर जबरन वसूली के प्रयास पर बीएनएस की धारा 308 लगती है। बच्चों के मामले में पोक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई होती है।
संकट में तुरंत यहां करें संपर्क
साइबर बुलिंग जैसे संकट की स्थिति में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर संपर्क कर सकते हैं। साइबर धोखाधड़ी जैसे मामले में हेल्पलाइन नम्बर 1930 पर मदद मिल सकती है। अन्य आपातकालीन स्थिति में पुलिस सेवा के 112 और चाइल्ड हेल्पलाइन के केस में 1098 पर सहायता मिल सकती है।
वर्चुअल दुनिया में मर्यादा बनाए रखना भी नागरिक धर्म
डिजिटल स्पेस में की-बोर्ड के पीछे बैठा व्यक्ति यह भूल जाता है कि स्क्रीन के दूसरी तरफ भी कोई इंसान है, जिसका अपना आत्मसम्मान है। असहमति और व्यक्तिगत हमले में एक महीन रेखा है। उदयपुर जैसे शहर में जहां युवा तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म अपना रहे हैं, वहां स्कूल-कॉलेज और परिवारों को डिजिटल एथिक्स सिखाने की जरूरत है। यदि कोई ऑनलाइन ट्रोलिंग का शिकार हो रहा है तो सहने के बजाय कानूनी मदद लें।
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