थूर (उदयपुर)। श्रीधाम आश्रम, थूर में संस्कृतभारती की ओर से आयोजित छह दिवसीय आवासीय संस्कृत सम्भाषण शिविर का मंगलवार को समापन हुआ। आश्रम प्रमुख परमपूज्य राधिकाशरण महाराज के सान्निध्य में आयोजित समारोह में उन्होंने संस्कृत के महत्व और भारतीय संस्कृति में उसकी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए दैनिक व्यवहार में संस्कृत के प्रयोग का आह्वान किया।
संस्कृतभारती के महानगर मंत्री नरेंद्र शर्मा ने बताया कि 22 से 27 अक्टूबर तक चले शिविर में विद्यार्थियों और संस्कृत अनुरागियों को संवाद, व्याकरण, गीत, नाट्य और भाषा-क्रीड़ा के माध्यम से संस्कृत बोलने का प्रशिक्षण दिया गया। शिविर में प्रातः एकात्मता स्तोत्र और पंचांग से लेकर भोजन, खेल और आपसी बातचीत तक संस्कृत का प्रयोग किया गया। प्रतिभागियों ने पोहे को ‘पृथुकम्’, खीर को ‘पायसम्’, जलेबी को ‘कुण्डलिका’ और पानीपुरी को ‘जलपूरिका’ कहकर दैनिक जीवन में संस्कृत के प्रयोग का अभ्यास किया।
शिविर में विस्तारक गौरव साहु और महानगर शिक्षण प्रमुख श्रीयांश कंसारा ने प्रशिक्षण दिया। समापन समारोह में राघव, मयंक और वैदिक ने संस्कृत में अपने अनुभव साझा किए। मिताली, पारुल, ट्विंकल, भवानी, स्नेहलता और तनुजा ने संस्कृत में सामूहिक गीत प्रस्तुत किया।
शिविर में करीब 18 प्रतिभागियों सहित शिक्षक, गृहिणियां, उद्योगी वर्ग और संस्कृतप्रेमियों ने भाग लिया। मध्यप्रदेश सहित विभिन्न स्थानों से आए प्रतिभागियों ने संस्कृत में संवाद का अभ्यास किया। शिविर का उद्देश्य संस्कृत को अध्ययन की भाषा तक सीमित न रखकर दैनिक बोलचाल का हिस्सा बनाना था। समापन पर प्रतिभागियों ने संस्कृत के निरंतर प्रयोग और प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया।
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