उदयपुर। रोशनी, रंग-बिरंगी दुकानों, झूलों और सुरों की महफिल के साथ उदयपुर नगर निगम के दीपावली मेले का रंगारंग आगाज हो गया। बुधवार शाम टाउन हॉल परिसर में शुरू हुए मेले की सांस्कृतिक संध्या में भक्ति और राजस्थानी लोकसंगीत का अनूठा संगम देखने को मिला। कवयित्री एवं भजन गायिका अनामिका अंबर के रामभजनों ने माहौल को भक्तिमय बनाया, वहीं लोकगायक छोटू सिंह रावणा की प्रस्तुतियों पर दर्शक तालियां बजाते और झूमते नजर आए।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ मेले का शुभारंभ
मेले का उद्घाटन निम्बार्क पीठ अस्थल आश्रम के मेवाड़ महामंडलेश्वर श्री रासबिहारी शरण के सानिध्य में हुआ। राजस्थान सरकार के जनजाति मंत्री बाबूलाल खराड़ी, राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया, उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन, ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, पूर्व सांसद रघुवीर सिंह मीणा, महापौर पारस सिंघवी और निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना सहित अन्य अतिथियों ने भगवान गणेश की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर मेले की शुरुआत की। कार्यक्रम की शुरुआत मास्टर बैंड के बुलबुल भाई की स्वागत धुन से हुई।
रामभजनों ने बांधा भक्ति का समां
सांस्कृतिक संध्या में अनामिका अंबर ने भगवान श्रीराम को समर्पित भजनों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उनके भजन “हमने तो खुद को तुझको है सौंपा, अब तू बिगाड़े या तू संवारे” पर पूरा पांडाल रामभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।
उन्होंने अपने लिखे भजन “राम भक्त ही राज करेगा दिल्ली के सिंहासन पर” की प्रस्तुति भी दी, जिस पर दर्शकों ने तालियों के साथ उत्साह जताया। आयोजन के दौरान उन्होंने युवा पीढ़ी को ध्यान में रखकर भजन-क्लबिंग शैली की प्रस्तुति देकर भी दर्शकों की वाहवाही बटोरी।
छोटू सिंह रावणा की लोकगायकी पर झूमे दर्शक
अनामिका अंबर से पहले छोटू सिंह रावणा ने अपनी राजस्थानी लोकगायकी और भजनों से सांस्कृतिक शाम में रंग जमा दिया। “मुझे ला दो भजन वाली वो माला” और “राजा रणछोड़ छे” जैसी प्रस्तुतियों में राजस्थान की लोकपरंपरा, भक्ति और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। दोनों कलाकारों की प्रस्तुतियों ने मेले की पहली सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।
15 झूले और 300 दुकानों से सजा मेला
नगर निगम के अनुसार, इस बार मेले में छोटे-बड़े कुल 15 झूले लगाए गए हैं और लगभग 300 दुकानों के जरिए खरीदारी व खानपान के विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। यहां कपड़े, जूते, मनिहारी और घर की सजावट से जुड़े सामान के साथ विभिन्न राज्यों की कलात्मक वस्तुएं भी आकर्षण का केंद्र हैं। दीपावली मेला इस बार 15 दिनों तक आयोजित किया जा रहा है। सांस्कृतिक कार्यक्रम 28 अक्टूबर से 3 नवंबर तक होंगे, जबकि मेला 11 नवंबर तक जारी रहेगा।
नगर निगम कार्यालय को रोशनी से सजाया
मेले के अवसर पर नगर निगम के टाउन हॉल परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया गया है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए ऊंचा मंच तैयार किया गया है और दर्शकों की सुविधा के लिए एलईडी स्क्रीन भी लगाई गई है, ताकि पीछे बैठे लोग भी कार्यक्रमों का आनंद ले सकें।
उद्घाटन समारोह में मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कहा कि ऐसे आयोजन शहरवासियों के साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी स्थानीय संस्कृति से परिचित कराने का अवसर देते हैं। उन्होंने स्थानीय प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने की पहल की सराहना की।
महापौर पारस सिंघवी ने अपने संबोधन में कहा कि निगम शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। महामंडलेश्वर रासबिहारी शरण ने ऐसे आयोजनों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बताया।
रेपरिया बालम और फकीरा खान फोक बैंड की प्रस्तुति
मेले की अगली सांस्कृतिक संध्या में गुरुवार को रेपरिया बालम बैंड और फकीरा खान फोक बैंड प्रस्तुति देंगे। आयोजकों के अनुसार, दोनों समूह अपनी विशिष्ट संगीत शैलियों और पारंपरिक लोकधुनों के माध्यम से दर्शकों को राजस्थान की समृद्ध लोकसंस्कृति से रूबरू कराएंगे।
नगर निगम महापौर पारस सिंघवी, आयुक्त अभिषेक खन्ना और उप आयुक्त एवं मेला प्रभारी हरि सिंह देवल ने शहरवासियों से मेले में पहुंचकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने की अपील की है।
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