उदयपुर। शरद पूर्णिमा की अलौकिक चांदनी और महारास के आध्यात्मिक दृश्य को मेवाड़ की पारंपरिक मिनिएचर शैली में जीवंत किया गया है। जाने-माने मिनिएचर कलाकार शांतिलाल शर्मा ने चार माह के कड़े परिश्रम और साधना के बाद भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों के महारास प्रसंग को एक कैनवास पर साकार किया है। इस पारंपरिक कलाकृति की सबसे बड़ी विशेषता इसका विशुद्ध प्राकृतिक स्वरूप है। चित्र में रासायनिक रंगों के स्थान पर पत्थर के रंग (स्टोन कलर), शुद्ध देसी नील और 99 प्रतिशत शुद्ध सोने के वर्क का उपयोग किया गया है। शर्मा ने बताया कि शरद पूर्णिमा की धवल आभा, गोपियों के 16 शृंगार, वस्त्रों की सिलवटों और हर गोपी के संग मुरलीधर के दिव्य प्रकटीकरण को उकेरने के लिए रंगों की कई परतें तैयार की गईं। कलाकार के अनुसार, मेवाड़ की इस बहुमूल्य पारंपरिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए युवाओं को जोड़ना और नियमित कार्यशालाओं का आयोजन करना आवश्यक है, जिससे इस प्राचीन धरोहर का संरक्षण हो सके।