उदयपुर। कोई घोड़े को खास एसी एंबुलेंस में लेकर पहुंचा, तो कोई अपनी गाय और भैंस की खूबियों के दम पर पुरस्कार जीतने की उम्मीद लेकर आया। मावली के विशनजी की छापर स्थित मेला मैदान में चल रहे जिला स्तरीय पशु मेले में पशुपालकों का उत्साह देखने को मिल रहा है। पशुपालन विभाग की ओर से 6 से 11 अक्टूबर तक आयोजित मेले में दो दिन के दौरान गोवंश, भैंसवंश और अश्ववंश की प्रतियोगिताओं में कुल 140 पशुओं का पंजीकरण हुआ है।
प्रतियोगिताओं में पशुओं की विशेषताओं और प्रदर्शन के आधार पर विजेताओं को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया जा रहा है। मेले में दूसरे जिलों से भी पशुपालक पहुंचे हैं। दूरदराज से आए अश्वपालकों द्वारा घोड़ों को विशेष एसी एंबुलेंस में लाना लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
घोड़ों की सबसे ज्यादा भागीदारी
प्रतियोगिताओं के आंकड़ों पर नजर डालें तो घोड़ों को लेकर पशुपालकों में सबसे ज्यादा उत्साह नजर आया। 10 अक्टूबर को आयोजित अश्ववंश प्रतियोगिता में 75 घोड़ों का पंजीकरण हुआ। इसी दिन भैंसवंश वर्ग में 25 पशु प्रतियोगिता में शामिल हुए। इससे एक दिन पहले 9 अक्टूबर को गोवंश की प्रतियोगिताएं हुई थीं, जिनमें 33 गायों और 7 बैलों का पंजीकरण किया गया। इस तरह गोवंश की प्रतियोगिता में 40, भैंसवंश में 25 और अश्ववंश में 75 पशु शामिल हुए।
प्रतियोगिताओं के साथ लोक संस्कृति की छटा
पशुओं की प्रतिस्पर्धा के साथ मेले में राजस्थान की लोक संस्कृति भी रंग जमा रही है। प्रतिदिन शाम 7 से रात 10 बजे तक भारतीय लोक कला मंडल के कलाकार लोक नृत्य और लोक गायन की प्रस्तुतियां दे रहे हैं। इससे पशुपालन की परंपरा के साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को भी मंच मिल रहा है। प्रतियोगिताओं के दौरान उदयपुर संभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. शैलेंद्र कुमार शुक्ल और मेला अधिकारी एवं उदयपुर जिले के संयुक्त निदेशक डॉ. लज्जाराम मीणा मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मुकेश नागोरी ने किया।
एसी एंबुलेंस में सवार होकर पहुंचे घोड़े
मावली के पशु मेले में 140 पशुओं ने दिखाया दमखम, विशनजी की छापर के मेला मैदान में प्रतियोगिताएं
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