उदयपुर। चार दशक से अधिक समय तक कानून की आंखों में धूल झोंक रहे एक भगोड़े अपराधी को उदयपुर की धानमंडी थाना पुलिस ने आखिरकार दबोच लिया। नौकरी लगवाने के नाम पर धोखाधड़ी करने के मामले में 43 साल से फरार चल रहे उद्घोषित अपराधी विजय कुमार यादव (69) को पुलिस टीम ने हिमाचल प्रदेश के नाहन (जिला सिरमौर) से गिरफ्तार किया है। आरोपी वहां पहचान बदलकर चौगान खेल मैदान में युवाओं को फुटबॉल कोचिंग दे रहा था। जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के निर्देशन, एएसपी उमेश ओझा व वृत्ताधिकारी राजेश यादव के सुपरविजन में धानमंडी थानाधिकारी गजवीर सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने इस जटिल ऑपरेशन को अंजाम दिया।
1984 में 32 हजार की ठगी कर बंद कर दिया था दफ्तर
मामले के अनुसार, 5 मार्च 1984 को कनावड़ा निवासी भंवर सिंह ने धानमंडी थाने में रिपोर्ट दी थी कि किनारा ग्रुप/अग्रवाल सेल्स के मैनेजर नरेंद्र सिंह यादव और अन्य कर्मचारियों ने भारत सरकार की मान्यता का झांसा देकर नौकरी लगाने के नाम पर उनसे 3 हजार रुपये ऐंठे थे। आरोपियों ने अलग-अलग लोगों से कुल 32,000 रुपये ठगे और दफ्तर बंद कर फरार हो गए। पुलिस ने तब प्रकरण संख्या 27/1984 धारा 420, 406 व 120(बी) आईपीसी में केस दर्ज किया था। मामले में 9 आरोपी पहले ही पकड़े जा चुके थे, लेकिन विजय कुमार यादव लगातार फरार चल रहा था।
पैतृक रिकॉर्ड से नाम कटवाया, खिलाड़ी बनकर पहुंची पुलिस
मूल रूप से रूपगढ़ (जिला भिवानी, हरियाणा) निवासी विजय कुमार यादव वारदात के समय महज 26 वर्ष का था। उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने पैतृक गांव के सभी दस्तावेजों से अपना नाम तक हटवा दिया था और अलग-अलग राज्यों में फुटबॉल कोच बनकर फरारी काट रहा था। साइबर सेल व मुखबिर तंत्र से सुराग मिलने के बाद उदयपुर पुलिस की टीम हिमाचल प्रदेश पहुंची। पुलिसकर्मियों ने खुद को फुटबॉल खिलाड़ी बताया और ट्रेनिंग लेने के बहाने नाहन के चौगान मैदान में कोच विजय कुमार से संपर्क साधा और उसे ग्राउंड पर ही दबोच लिया।