उदयपुर। झीलों, महलों और समृद्ध कला-संस्कृति के लिए दुनियाभर में पहचान रखने वाले उदयपुर की हस्तकला अब बड़े मंचों तक अपनी पहचान बना रही है। उदयपुर से शुरू हुए हस्तनिर्मित उत्पादों के ब्रांड ‘रंगौरी’ ने दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित हस्तशिल्प प्रदर्शनी में अपनी कला का प्रदर्शन किया। यहां ब्रांड ने मेवाड़ की कलात्मक विरासत और भारतीय हस्तकला को आधुनिक डिजाइन के साथ प्रस्तुत किया।
मां-बेटी के विचार से शुरू हुआ सफर
‘रंगौरी’ की शुरुआत एक ऐसे विचार से हुई, जिसमें भारतीय परंपरा और विरासत को संरक्षित रखते हुए उसे आज की पीढ़ी की पसंद और आधुनिक जीवनशैली से जोड़ने की कोशिश की गई। इस विचार को मां-बेटी की जोड़ी ने मिलकर आकार दिया। ब्रांड के उत्पादों में एक ओर भारतीय परंपराओं और विरासत का अनुभव दिखाई देता है, वहीं दूसरी ओर नई पीढ़ी की रचनात्मक सोच और आधुनिक डिजाइन की झलक देखने को मिलती है।
रंगों और त्योहारों की चमक से बना ‘रंगौरी’
ब्रांड के नाम के पीछे भी भारतीय संस्कृति से जुड़ी सोच है। ‘रंग’ भारतीय संस्कृति, उत्सव और विविधता का प्रतीक है, जबकि ‘औरी’ गर्माहट, चमक और त्योहारों से जुड़ी सकारात्मक ऊर्जा को दर्शाता है। रंगौरी की खासियत यह है कि इसके उत्पाद मशीनों से तैयार होने वाली एकरूपता के बजाय हाथों की मेहनत और बारीक कारीगरी पर आधारित हैं। प्रत्येक उत्पाद में रंग, सामग्री, डिजाइन और उसकी बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। ब्रांड की ओर से क्रोशिया से बने खिलौने, फूल, बालों के सजावटी सामान, होम डेकोर आइटम, पारंपरिक बंदनवार, हैंगिंग, तैयार रंगोलियां, मोतियों से बने आभूषण सहित कई तरह की सजावटी वस्तुएं तैयार की जाती हैं।
पसंद के अनुसार तैयार होते हैं उत्पाद
रंगौरी ग्राहकों को अपनी पसंद के अनुसार उत्पाद तैयार करवाने का विकल्प भी देता है। ग्राहक अपनी पसंद का रंग, थीम और डिजाइन चुन सकते हैं। इसके अलावा किसी विशेष पोशाक या अवसर के अनुरूप आभूषण और सजावटी उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं।
जरी, मोती और कुंदन का आधुनिक अंदाज
रंगौरी के उत्सव संग्रह में पारंपरिक जरी कढ़ाई, मोती और कुंदन जैसी भारतीय कलात्मक शैलियों को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य भारतीय विरासत की मूल पहचान को बनाए रखते हुए ऐसे उत्पाद तैयार करना है, जिन्हें आज की पीढ़ी अपने घरों, त्योहारों और खास मौकों पर आसानी से इस्तेमाल कर सके। ब्रांड की लोकप्रिय कृतियों में ‘पर्ल फ्लोरल कुंदन बेल हैंगिंग’ भी शामिल है, जो पारंपरिक सजावट और आधुनिक डिजाइन के मेल को दर्शाती है।
एक उत्पाद के पीछे कई चरणों की मेहनत
रंगौरी के किसी भी उत्पाद को तैयार करने की प्रक्रिया एक विचार से शुरू होती है। इसके बाद विषय, सामग्री, रंग और डिजाइन का चयन किया जाता है। त्योहार के माहौल, उपयोगिता और उत्पाद की मजबूती को ध्यान में रखते हुए हर छोटी बारीकी पर काम किया जाता है। अंतिम चरण में किनारों और सजावटी हिस्सों को बारीकी से तैयार किया जाता है। उत्पाद की मजबूती और गुणवत्ता की जांच के बाद ही उसे अंतिम रूप दिया जाता है।
उदयपुर और मेवाड़ की विरासत से मिलती है प्रेरणा
रंगौरी के डिजाइन में उदयपुर और मेवाड़ की कला एवं सांस्कृतिक विरासत की झलक भी दिखाई देती है। शहर की रंगीन संस्कृति, पारंपरिक कलात्मकता और त्योहारों की जीवंतता ब्रांड के लिए लगातार प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। ब्रांड का मानना है कि हस्तनिर्मित वस्तुएं केवल सजावट का सामान नहीं होतीं, बल्कि इनके माध्यम से एक पीढ़ी की कला और परंपरा अगली पीढ़ी तक पहुंचती है। इसी सोच के साथ रंगौरी आधुनिक घरों और जीवनशैली के लिए परंपरा को नए रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में काम कर रहा है।
दिल्ली से आगे वैश्विक पहचान बनाने की तैयारी
दिल्ली में आयोजित हस्तशिल्प प्रदर्शनी में लोगों से मिली प्रतिक्रिया और मांग ने रंगौरी को अपने विस्तार की दिशा में आगे बढ़ने का उत्साह दिया है। ब्रांड अब नए उत्सव आधारित कलेक्शन तैयार करने के साथ ग्राहकों की विशेष मांग के अनुरूप उत्पाद बनाने की क्षमता को भी विस्तार दे रहा है। प्रदर्शनियों और विभिन्न आयोजनों के माध्यम से लोगों को भारतीय हस्तकला से सीधे जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। रंगौरी का लक्ष्य खुद को ऐसे भारतीय ब्रांड के रूप में स्थापित करना है, जहां विरासत और आधुनिकता का संगम दिखाई दे और देश की हस्तनिर्मित कला को भारतीय घरों के साथ-साथ वैश्विक मंचों तक पहुंचाया जा सके। उदयपुर से शुरू हुई रंगौरी की यह यात्रा दिखाती है कि विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उसे पीछे छोड़ना जरूरी नहीं है। धागे, मोती, रंग और हुनरमंद हाथों से तैयार ये हस्तनिर्मित उत्पाद मेवाड़ की कला और भारतीय परंपरा की कहानी को आधुनिक अंदाज में दुनिया तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
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