जयपुर। राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव 2026 का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। राज्य में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव चार चरणों में कराए जाएंगे। चुनाव कार्यक्रम जारी होने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। ताजा जानकारी के अनुसार प्रदेश में करीब 4.03 करोड़ ग्रामीण मतदाता पंचायतीराज संस्थाओं के विभिन्न पदों के लिए मतदान करेंगे।

23 अक्टूबर से शुरू होगी मतदान प्रक्रिया

राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए चार चरणों में मतदान होगा। मतदान की तारीखें 23 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 4 नवंबर और 14 नवंबर 2026 निर्धारित की गई हैं। पंच और सरपंच के चुनाव भी चरणबद्ध तरीके से कराए जाएंगे, जिनके लिए अलग से लोकसूचना जारी की जाएगी।

करीब 1.69 लाख पदों पर होगा चुनाव

पंचायतीराज चुनाव के तहत प्रदेश में बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधियों का चुनाव होगा। उपलब्ध ताजा जानकारी के अनुसार करीब 1.69 लाख से अधिक पदों पर निर्वाचन होना है। इनमें जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, सरपंच और वार्ड पंच सहित विभिन्न पद शामिल हैं।

कोटा समेत 4 जिलों में 22 दिसंबर को प्रमुख-प्रधान का चुनाव

चुनाव कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण तारीखों में 22 दिसंबर 2026 शामिल है। इस दिन कोटा, श्रीगंगानगर, बारां और करौली जिलों में जिला प्रमुख और पंचायत समितियों के प्रधानों का चुनाव कराया जाएगा। इन पदों का चुनाव सीधे आम मतदाताओं द्वारा नहीं, बल्कि संबंधित निर्वाचित जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के माध्यम से होता है।

महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण

इस बार पंचायतीराज चुनाव में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। रिपोर्टों के अनुसार करीब 7,201 ग्राम पंचायतों में महिला सरपंच चुनी जाएंगी, जबकि 20 जिलों में जिला प्रमुख का पद महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा। इसके अलावा वर्गवार आरक्षण भी लागू रहेगा।

बैलेट पेपर से होंगे पंच-सरपंच के चुनाव

पंच और सरपंच पदों के चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराए जाने की जानकारी सामने आई है। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया भी आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।

राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव के जरिए गांव से लेकर जिला स्तर तक स्थानीय जनप्रतिनिधियों का निर्वाचन होगा। अब नामांकन, मतदान, मतगणना और इसके बाद प्रमुख-प्रधान के चुनाव की प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।