उदयपुर। महिला सुरक्षा और अधिकारों को लेकर रविवार को उदयपुर में निकाले गए मार्च के दौरान पोस्टर को लेकर विवाद हो गया। उदयपुर महिला अधिकार मंच की ओर से आरोप लगाया गया कि मार्च में शामिल युवतियों के साथ कॉकरोच पार्टी के पुरुष कार्यकर्ता चिराग खण्डेलवाल ने धक्का-मुक्की की और उनके हाथों से पोस्टर छीनकर उन्हें अलग कर दिया। विवाद बढ़ने पर पुलिस ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों को अलग किया।
उदयपुर महिला अधिकार मंच के अनुसार, सार्वजनिक कार्यक्रम में मंच की कार्यकर्ता भी महिला अधिकारों के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से शामिल हुई थीं। मंच की कॉर्डिनेटर करिश्मा के नेतृत्व में युवतियां मार्च में शामिल हुईं। उनके पोस्टरों में ‘टू जेंडर वन स्पिरिट’, ‘नीरजा भनोत एंड समित’, ‘मेवाड़ का स्वाभिमान- जौहर का सम्मान’ जैसे संदेश थे। इसके अलावा बादशाह की छाती पर पैर रखने वाली किरणा कुंवर के बीकानेर संग्रहालय में प्रदर्शित चित्र को भी पोस्टर के माध्यम से दर्शाया गया था।
मंच का आरोप है कि इसी दौरान कॉकरोच पार्टी के चिराग खण्डेलवाल ने युवतियों से धक्का-मुक्की करते हुए पोस्टर छीन लिए और उन्हें धक्का देकर अलग कर दिया। मंच के अनुसार, चिराग ने कहा कि मार्च उनके द्वारा तय नियमों के अनुसार होगा। इसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति संभाली। उदयपुर महिला अधिकार मंच की सेक्रेटरी रीना ने कहा कि युवतियों के साथ एक पुरुष द्वारा की गई धक्का-मुक्की से वहां मौजूद लोग हतप्रभ रह गए। उन्होंने महिला न्याय एवं अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर मंच का पक्ष भी रखा।
गर्भवती महिलाओं की मृत्यु और पहचान छिपाकर संबंधों का मुद्दा उठाया
रीना ने कहा कि गर्भवती महिलाओं की मृत्यु भी चिंता का विषय बनकर उभरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी पहचान छिपाकर लड़कियों को योजनाबद्ध तरीके से भावनात्मक प्रेम संबंध में फंसाकर पंथ परिवर्तन करवाने की घटनाओं को रोकने के लिए कठोर कानून की आवश्यकता है। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं का उपयोग किसी मजहब की संख्या बढ़ाने के लिए किया जाना निंदनीय है और लड़कियों पर बड़ी संख्या में बच्चे पैदा करने का दबाव डाले जाने की बात भी कही।
नाता प्रथा के दुरुपयोग पर चिंता
मंच ने दक्षिण राजस्थान में नाता प्रथा के कथित दुरुपयोग पर भी चिंता जताई। रीना के अनुसार, धन और रसूख के कारण कुछ प्रभावशाली लोग विवाह-विच्छेद के बाद अनेक विवाह कर रहे हैं। उन्होंने अभिनेता आमिर खान का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में वे इन लोगों के लिए नायक के रूप में सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि बहुविवाह की स्थिति में महिलाओं के स्वाभिमान से समझौता होता है और उन्हें दोयम दर्जे का व्यवहार सहना पड़ सकता है। मंच ने सरकार से मजहब के भेद से ऊपर उठकर सभी महिलाओं को समान अधिकार देने की मांग करते हुए समान नागरिक संहिता जैसे प्रावधानों की आवश्यकता बताई।
लिव-इन संबंधों में महिला और बच्चे की जिम्मेदारी तय करने की मांग
रीना ने आधुनिकता और स्वच्छंद रिश्तों के नाम पर नई पीढ़ी की लड़कियों के बीच लिव-इन संबंधों को बढ़ावा दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि ऐसे रिश्तों में लड़कियों के शारीरिक शोषण की आशंका रहती है और संबंध से बच्चे के जन्म के बाद पुरुष जिम्मेदारी से पीछे हट सकते हैं, जिससे महिला पर बच्चे की पूरी जिम्मेदारी आ जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में महिला को अकेले संघर्ष करना पड़ता है और बच्चे के सामने भी गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। मंच ने लिव-इन संबंधों का पंजीकरण अनिवार्य करने तथा महिला और बच्चे के प्रति पुरुष की कानूनी जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
परिवार को बेटियों के लिए संबल बनाने पर जोर
मंच ने कहा कि महिलाओं के लिए परिवार को संरक्षक और सहयोगी की भूमिका निभानी चाहिए तथा बेटियों को समान सम्मान, संरक्षण और अवसर मिलने चाहिए। हालांकि, मंच ने यह भी कहा कि जागरूकता के नाम पर सभी बेटियों को परिवार के खिलाफ खड़ा करना उचित नहीं है। पिता की सुरक्षा संबंधी चिंता को निगरानी के रूप में प्रस्तुत कर लड़कियों को भ्रमित किया जाना भी दुर्भाग्यपूर्ण है।
‘माय लाइफ, माय चॉइस’ अवधारणा पर सवाल
रीना ने ‘माय लाइफ, माय चॉइस’ जैसी अवधारणा को पश्चिमी समाज से प्रेरित बताते हुए कहा कि भारतीय परिवार व्यवस्था में परिवार एक इकाई के रूप में एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी रहता है और परस्पर सहयोग करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि योजनाबद्ध तरीके से परिवार व्यवस्था के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है और पश्चिमी अवधारणाएं थोपी जा रही हैं। मंच ने परिवार को बेटियों के लिए संबल, सुरक्षा और सहयोग का आधार बनाने पर जोर दिया।