राजस्थान न्यूज 24 | जयपुर
राजस्थान की राजधानी जयपुर में साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां साइबर अपराधियों ने पुलिस, एटीएस, एनआईए, आरबीआई और अन्य सरकारी संस्थाओं के अधिकारी बनकर एक बुजुर्ग दंपती को कथित तौर पर करीब 20 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डराए रखा। आरोपियों ने दंपती को आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े वित्तीय लेन-देन में शामिल होने और गिरफ्तारी का भय दिखाकर 2 करोड़ रुपये से अधिक की रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा ली।
मामले में सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस थाना, जयपुर की टीम ने पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के निवासी ललित विश्वास को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में अब तक तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। साइबर ठगी के नेटवर्क और धनराशि के लेन-देन से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी है।
पुलिस अधिकारी बनकर किया फोन, गिरफ्तारी का डर दिखाया
पुलिस के अनुसार, जयपुर निवासी पीड़िता ने 11 सितंबर 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 17 अगस्त को उनके पास एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को पुलिस इंस्पेक्टर बताया। उसने पीड़िता के खिलाफ वारंट जारी होने की बात कही।
इसके बाद कथित एटीएस अधिकारियों के नाम पर वीडियो कॉल के जरिए बातचीत करवाई गई। आरोपियों ने बुजुर्ग दंपती को बताया कि उनका नाम आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने वाले लोगों की सूची में है और उनके बैंक खाते का इस्तेमाल संदिग्ध लेन-देन में किया जा रहा है।
कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाकर आरोपियों ने दंपती पर दबाव बनाया। इसी भय का फायदा उठाकर उन्हें आरोपियों के निर्देशों का पालन करने और बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।
फर्जी दस्तावेज भेजकर 20 दिन तक वीडियो कॉल पर रखा
जांच के अनुसार, आरोपियों ने पुलिस, एटीएस, एनआईए, आरबीआई, भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट के नाम एवं पहचान का कथित दुरुपयोग किया। विश्वास पैदा करने के लिए व्हाट्सऐप पर फर्जी दस्तावेज, स्क्रीनशॉट और सरकारी तथा बैंकिंग प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेज भेजे गए।
बुजुर्ग दंपती को लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए कहा गया। आरोपियों ने उन्हें यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वे किसी गंभीर कानूनी जांच के दायरे में हैं और निर्देशों का पालन नहीं करने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।
इसी तरह करीब 20 दिन तक दबाव बनाए रखकर दंपती से अलग-अलग बैंक खातों में 2 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर करवाई गई।
बैंक खाते में आए 7 लाख रुपये, 70 हजार कमीशन लेने का आरोप
पुलिस ने मामले की जांच के दौरान कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), व्हाट्सऐप चैट, बैंक स्टेटमेंट, KYC दस्तावेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम कई बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित की गई थी।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी ललित विश्वास ने अपने नेटवर्क से जुड़े लोगों को बैंक खाते से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई और धनराशि के लेन-देन में सहायता की।
जांच में सामने आया कि आरोपी द्वारा उपलब्ध करवाए गए HDFC बैंक खाते में 2 सितंबर 2026 को 7 लाख रुपये जमा हुए थे। पुलिस का आरोप है कि इस रकम के बदले ललित विश्वास ने 70 हजार रुपये कमीशन प्राप्त किया।
अनुसंधान में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपने परिचित साहिब से HDFC बैंक खाते से संबंधित खाली चेक प्राप्त किया था। इसके बाद उक्त चेक असीम विश्वास और अतुन के मोबाइल नंबरों पर भेजा गया। पुलिस अब इस लेन-देन में शामिल अन्य व्यक्तियों और आरोपी की भूमिका की जांच कर रही है।
साइबर ठगी के नेटवर्क की जांच जारी
राजस्थान पुलिस के अनुसार, महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत जयपुर की सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस टीम ने यह कार्रवाई की।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने बताया कि मामले में साइबर ठगी के नेटवर्क और धनराशि के लेन-देन की जांच जारी है।
उप महानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम शान्तनु कुमार सिंह के निर्देशन तथा पुलिस उप अधीक्षक एवं थानाधिकारी गजेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने आरोपी को गिरफ्तार किया। टीम में पुलिस निरीक्षक राधेश्याम और कांस्टेबल कृष्ण कुमार तथा लक्ष्मण कुमार शामिल रहे।
क्या होता है ‘डिजिटल अरेस्ट’?
‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी का एक तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, जांच एजेंसी, न्यायालय या अन्य सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को फोन अथवा वीडियो कॉल करते हैं। इसके बाद फर्जी आरोपों, गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं।
ध्यान रखें: भारत में वीडियो कॉल के जरिए कोई व्यक्ति आपको कानूनी रूप से ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं कर सकता। पुलिस या जांच एजेंसी के नाम पर डराकर पैसे मांगने वालों पर भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध कॉल पर बैंक खाते की जानकारी, OTP या पैसे साझा न करें। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
राजस्थान न्यूज 24 की अपील: सरकारी अधिकारी होने का दावा करने वाला कोई व्यक्ति वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे मांगे, तो घबराकर रकम ट्रांसफर न करें। कॉल काटें, संबंधित विभाग के आधिकारिक संपर्क माध्यम से सत्यापन करें और जरूरत पड़ने पर पुलिस से संपर्क करें।
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