जयपुर। राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव 2026 को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यक्रम में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। धनतेरस पर्व को देखते हुए पहले, दूसरे और तीसरे चरण के चुनाव कार्यक्रम में बदलाव किया गया है। आयोग ने धार्मिक आस्था और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए पहले तीन चरणों में जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों के साथ पंच-सरपंच पदों के लिए होने वाले मतदान को पहले निर्धारित तारीख से एक दिन पहले कराने का निर्णय लिया है। संशोधित कार्यक्रम के बाद अब धनतेरस के दिन इन चरणों में मतदान नहीं होगा।
राज्य निर्वाचन आयोग के संशोधित कार्यक्रम के मुताबिक पहले चरण में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान अब 22 अक्टूबर 2026 को होगा। इसके बाद पंच और सरपंच पदों के लिए 24 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा। इसी तरह दूसरे चरण में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए 28 अक्टूबर तथा पंच-सरपंच के लिए 30 अक्टूबर को वोटिंग होगी। तीसरे चरण में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए 3 नवंबर और पंच-सरपंच के लिए 5 नवंबर को मतदान होगा।
आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि पहले तीन चरणों में मतदान की तारीखों को एक दिन आगे लाने के साथ-साथ मतदान दलों के प्रस्थान की तारीखों में भी संशोधन किया गया है। बाकी चुनावी प्रक्रिया घोषित कार्यक्रम के अनुसार ही चलेगी। चौथे चरण की तारीखों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
धनतेरस के दिन मतदान से मिली राहत
पंचायत चुनाव कार्यक्रम में यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि तीसरे चरण के पंच-सरपंच चुनाव के लिए पहले 6 नवंबर को मतदान प्रस्तावित था और इसी दिन धनतेरस का पर्व पड़ रहा है। धार्मिक पर्व के दौरान बड़ी संख्या में लोग पूजा-पाठ, खरीदारी और अन्य पारंपरिक गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के साथ मतदाताओं को भी असुविधा की संभावना थी।
राज्य निर्वाचन आयोग ने इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए चुनाव कार्यक्रम में बदलाव किया है। अब तीसरे चरण में पंच और सरपंच पदों के लिए मतदान 5 नवंबर को होगा और 6 नवंबर को धनतेरस के दिन मतदान की स्थिति नहीं रहेगी।
आयोग का यह निर्णय ग्रामीण राजस्थान में चुनावी तैयारियों पर भी असर डालेगा। उम्मीदवारों को अब प्रचार, जनसंपर्क और बूथ स्तर की तैयारियां संशोधित तारीखों के अनुसार करनी होंगी। वहीं मतदान केंद्रों पर तैनात होने वाले कर्मचारियों और प्रशासनिक मशीनरी को भी नए कार्यक्रम के अनुसार अपनी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी।
पहले चरण का पूरा संशोधित कार्यक्रम
पहले चरण में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान 22 अक्टूबर 2026 को होगा। इससे पहले मतदान दलों की रवानगी और संबंधित मतदान केंद्रों तक पहुंचने की प्रक्रिया 21 अक्टूबर को होगी।
इसके बाद पंच और सरपंच पदों के लिए नामांकन की प्रक्रिया 23 अक्टूबर को होगी। पंच और सरपंच पदों के लिए मतदान 24 अक्टूबर को कराया जाएगा। इसके बाद 25 अक्टूबर को उप सरपंच का चुनाव होगा।
यानी पहले चरण में चुनावी प्रक्रिया लगातार कई दिनों तक चलेगी और जिला परिषद-पंचायत समिति सदस्य तथा पंच-सरपंच चुनाव के बीच दो दिन का अंतर रहेगा।
पहले चरण की तारीखें
- 21 अक्टूबर: जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के लिए मतदान दलों का प्रस्थान/पहुंच
- 22 अक्टूबर: जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के लिए मतदान
- 23 अक्टूबर: पंच/सरपंच के लिए नामांकन
- 24 अक्टूबर: पंच/सरपंच के लिए मतदान
- 25 अक्टूबर: उप सरपंच का चुनाव
दूसरे चरण में 28 और 30 अक्टूबर को मतदान
दूसरे चरण के चुनाव कार्यक्रम में भी इसी तरह बदलाव किया गया है। दूसरे चरण के लिए मतदान दल अब 27 अक्टूबर को रवाना होंगे। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान 28 अक्टूबर को होगा।
इसके बाद 29 अक्टूबर को पंच और सरपंच पद के लिए नामांकन प्रक्रिया होगी। पंच-सरपंच पद के लिए मतदान 30 अक्टूबर को कराया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 31 अक्टूबर को उप सरपंच का चुनाव होगा।
दूसरे चरण में भी जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य के चुनाव और पंच-सरपंच चुनाव के बीच दो दिन का अंतर रखा गया है।
दूसरे चरण की तारीखें
- 27 अक्टूबर: जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के लिए मतदान दलों का प्रस्थान/पहुंच
- 28 अक्टूबर: जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के लिए मतदान
- 29 अक्टूबर: पंच/सरपंच के लिए नामांकन
- 30 अक्टूबर: पंच/सरपंच के लिए मतदान
- 31 अक्टूबर: उप सरपंच का चुनाव
तीसरे चरण में सबसे अहम बदलाव
तीसरे चरण का कार्यक्रम इस पूरे संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। पहले जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान 4 नवंबर को तथा पंच-सरपंच के लिए मतदान 6 नवंबर को प्रस्तावित था। 6 नवंबर को धनतेरस होने के कारण अब इस चरण की चुनावी प्रक्रिया को एक दिन पहले कर दिया गया है।
संशोधित कार्यक्रम के मुताबिक तीसरे चरण में मतदान दलों की रवानगी 2 नवंबर को होगी। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान 3 नवंबर को कराया जाएगा।
इसके बाद पंच और सरपंच पद के लिए नामांकन 4 नवंबर को होगा और मतदान 5 नवंबर को कराया जाएगा। 6 नवंबर को उप सरपंच का चुनाव होगा।
तीसरे चरण की तारीखें
- 2 नवंबर: जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के लिए मतदान दलों का प्रस्थान/पहुंच
- 3 नवंबर: जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्य के लिए मतदान
- 4 नवंबर: पंच/सरपंच के लिए नामांकन
- 5 नवंबर: पंच/सरपंच के लिए मतदान
- 6 नवंबर: उप सरपंच का चुनाव
चौथे चरण में कोई बदलाव नहीं
राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले तीन चरणों के कार्यक्रम में संशोधन किया है, लेकिन चौथे चरण के कार्यक्रम को यथावत रखा गया है। संशोधित व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य धनतेरस के दिन मतदान की स्थिति को समाप्त करना है।
चौथे चरण में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान 14 नवंबर को तथा पंच और सरपंच पदों के लिए मतदान 16 नवंबर को होगा। चौथे चरण की मतदान प्रक्रिया के लिए मतदान दलों का प्रस्थान 13 नवंबर को निर्धारित है।
चुनावी तैयारियों पर पड़ेगा सीधा असर
तारीखों में बदलाव के बाद अब पंचायत चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को अपनी रणनीति नए कार्यक्रम के अनुसार बनानी होगी। खास तौर पर पहले तीन चरणों के प्रत्याशियों के लिए प्रचार और जनसंपर्क की समय-सीमा में व्यावहारिक बदलाव आया है।
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्र में मतदाताओं तक पहुंच बनाने में जुटे हैं। वहीं ग्राम पंचायत स्तर पर पंच और सरपंच पद के उम्मीदवारों के लिए चुनाव का माहौल अलग स्तर पर दिखाई देगा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दे, विकास कार्य, सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पंचायत स्तर पर उपलब्ध सुविधाएं चुनावी चर्चा के प्रमुख विषय बन सकते हैं।
पंचायत चुनाव में गांव के स्तर पर उम्मीदवारों का सीधा संपर्क मतदाताओं से होता है। ऐसे में चुनाव की तारीख में एक दिन का बदलाव भी उम्मीदवारों की प्रचार रणनीति और बूथ प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।
उम्मीदवार और मतदाता तारीखों को लेकर रहें सतर्क
चुनाव कार्यक्रम में बदलाव के बाद उम्मीदवारों और मतदाताओं के लिए सबसे जरूरी है कि वे पुरानी तारीखों के बजाय संशोधित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार अपनी तैयारी करें। खास तौर पर तीसरे चरण से जुड़े मतदाताओं को यह ध्यान रखना होगा कि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के लिए मतदान अब 3 नवंबर को तथा पंच-सरपंच के लिए मतदान 5 नवंबर को होगा।
इसी तरह पहले चरण में 22 और 24 अक्टूबर तथा दूसरे चरण में 28 और 30 अक्टूबर को मतदान होगा।
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी संशोधित कार्यक्रम के अनुसार मतदान का समय जिला परिषद एवं पंचायत समिति तथा पंच-सरपंच चुनाव के लिए निर्धारित समय-सारणी के अनुसार रहेगा। चुनाव से जुड़ी अन्य प्रक्रियाएं भी आयोग द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक संचालित होंगी।
चुनावी कैलेंडर में बदलाव का असर पूरे ग्रामीण क्षेत्र पर
राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में पंचायत चुनाव केवल राजनीतिक प्रक्रिया नहीं बल्कि स्थानीय स्तर पर नेतृत्व चुनने की बड़ी कवायद है। ग्राम पंचायत से लेकर पंचायत समिति और जिला परिषद तक होने वाले चुनावों का सीधा असर स्थानीय विकास और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ता है।
ऐसे में चुनाव की तारीखों में बदलाव के बाद गांवों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। संभावित उम्मीदवारों से लेकर राजनीतिक दलों तक सभी को अब संशोधित कार्यक्रम के मुताबिक अपनी तैयारियां पूरी करनी होंगी।
धनतेरस के दिन मतदान नहीं होने से मतदाताओं को भी त्योहार और मतदान के बीच चुनाव करने जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों के लिए भी संशोधित कार्यक्रम के अनुसार व्यवस्थाएं तय की जाएंगी।
एक नजर में पूरा संशोधित चुनाव कार्यक्रम
| चरण | मतदान दलों का प्रस्थान | जिला परिषद/पंचायत समिति मतदान | पंच/सरपंच नामांकन | पंच/सरपंच मतदान | उप सरपंच चुनाव |
|---|---|---|---|---|---|
| पहला चरण | 21 अक्टूबर | 22 अक्टूबर | 23 अक्टूबर | 24 अक्टूबर | 25 अक्टूबर |
| दूसरा चरण | 27 अक्टूबर | 28 अक्टूबर | 29 अक्टूबर | 30 अक्टूबर | 31 अक्टूबर |
| तीसरा चरण | 2 नवंबर | 3 नवंबर | 4 नवंबर | 5 नवंबर | 6 नवंबर |
| चौथा चरण | 13 नवंबर | 14 नवंबर | 15 नवंबर | 16 नवंबर | 17 नवंबर |
इस तरह राजस्थान में पंचायत चुनाव की तस्वीर अब और स्पष्ट हो गई है। पहले तीन चरणों में मतदान पहले की प्रस्तावित तारीख से एक दिन पहले होगा, जबकि चौथे चरण में कोई बदलाव नहीं किया गया है। धनतेरस को देखते हुए किया गया यह संशोधन धार्मिक आस्था और जनभावनाओं को ध्यान में रखकर किया गया है। अब ग्रामीण राजस्थान में चुनावी गतिविधियां संशोधित कैलेंडर के अनुसार आगे बढ़ेंगी और उम्मीदवारों से लेकर प्रशासन तक सभी को नई तारीखों के मुताबिक अपनी तैयारियां पूरी करनी होंगी।
Continue With Google
Comments (0)