जयपुर। राजस्थान समेत देशभर में UPI पेमेंट पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर व्यापारिक संगठनों और कारोबारियों के बीच विरोध देखने को मिल रहा है। पहले 2 अक्टूबर को ‘No UPI Day’ मनाने की घोषणा की गई थी, जिसके तहत व्यापारियों से UPI QR कोड, स्कैनर और साउंड बॉक्स को ढककर डिजिटल भुगतान के बजाय नकद भुगतान लेने की अपील की गई थी। हालांकि, अब इस विरोध को लेकर व्यापारिक संगठनों में स्थिति बदल गई है और सभी संगठन इस अभियान के साथ नहीं हैं।
2 अक्टूबर को क्या होगा?
‘No UPI Day’ का आह्वान मुख्य रूप से उन व्यापारिक संगठनों की ओर से किया गया था, जो प्रस्तावित MDR व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं। इनके अनुसार 2 अक्टूबर को प्रतीकात्मक रूप से UPI से भुगतान नहीं लेने और ग्राहकों से नकद भुगतान करने की अपील की जाएगी। कुछ संगठनों ने QR कोड और डिजिटल पेमेंट डिवाइस को काले कपड़े से ढककर विरोध जताने की बात भी कही है।
हालांकि, इसे देशभर में UPI सेवा बंद होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। UPI सिस्टम सामान्य रूप से काम करता रहेगा। विरोध का मुद्दा कुछ व्यापारियों द्वारा दुकानों पर UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने से जुड़ा है।
राजस्थान में क्यों बढ़ा विरोध?
राजस्थान के व्यापारिक संगठनों ने भी प्रस्तावित MDR को लेकर चिंता जताई है। राजस्थान में व्यापारियों का कहना है कि कई कारोबार कम मार्जिन पर चलते हैं और ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत आने से उनके खर्च पर दबाव बढ़ सकता है। राजस्थान के व्यापारिक संगठनों ने सरकार से प्रस्तावित व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग भी की है।
खास तौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, फर्नीचर, ज्वेलरी, ऑटोमोबाइल, पर्यटन और अन्य ऐसे कारोबार जहां भुगतान की राशि अक्सर 2,000 रुपये से अधिक होती है, वहां MDR का असर ज्यादा दिखाई देने की आशंका व्यापारिक संगठनों ने जताई है।
क्या है MDR और कितना लगेगा?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो निर्धारित परिस्थितियों में डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले व्यापारी पक्ष पर लगाया जाता है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI ट्रांजैक्शन में 2,000 रुपये से अधिक की राशि पर 0.40% MDR लागू होना है। उदाहरण के तौर पर 10,000 रुपये के पात्र लेनदेन पर 0.40% की दर से 40 रुपये बनते हैं।
हालांकि, यह रकम ग्राहक से अलग से ‘UPI चार्ज’ के रूप में लेने की व्यवस्था नहीं है। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि छोटे व्यापारियों के लिए निर्धारित छूट और अधिकतम शुल्क सीमा जैसी व्यवस्थाएं लागू रहेंगी।
छोटे व्यापारियों के लिए क्या है नियम?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिन छोटे व्यापारियों की UPI के जरिए मासिक प्राप्तियां निर्धारित 1 लाख रुपये तक हैं, उन्हें प्रस्तावित MDR व्यवस्था से बाहर रखने का प्रावधान है। वहीं बड़े पात्र लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तक रखी गई है।
इसका मतलब यह है कि हर UPI भुगतान पर चार्ज नहीं लगेगा और हर दुकानदार पर भी MDR लागू नहीं होगा।
व्यापारिक संगठनों की मांग क्या है?
व्यापारी संगठनों की प्रमुख मांग है कि UPI पर MDR लागू करने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए। कुछ संगठनों ने MDR लागू करने की तारीख टालने, छोटे व्यापारियों के लिए तय सीमा बढ़ाने और Merchant-to-Merchant यानी M2M लेनदेन को इसके दायरे से बाहर रखने की मांग की है।
विरोध को लेकर अब स्थिति क्या है?
इस पूरे मामले में 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ है। AIMRA और AICPDF ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के बाद 2 अक्टूबर का प्रस्तावित ‘No UPI Day’ विरोध वापस ले लिया। व्यापारिक प्रतिनिधियों को उनकी चिंताओं पर विचार किए जाने का आश्वासन मिला है।
वहीं दूसरी ओर CTI जैसे कुछ व्यापारिक संगठन अभी भी 2 अक्टूबर को MDR के विरोध में ‘No UPI Day’ मनाने की बात कर रहे हैं। CAIT ने अलग से स्पष्ट किया है कि उसने 2 अक्टूबर को देशव्यापी UPI बहिष्कार का कोई आधिकारिक फैसला या घोषणा नहीं की है।
यानी राजस्थान में भी 2 अक्टूबर को हर दुकान पर UPI बंद रहेगा, ऐसा कहना सही नहीं होगा। अलग-अलग व्यापारिक संगठनों और बाजारों का निर्णय अलग हो सकता है।
ग्राहकों के लिए क्या जरूरी है?
2 अक्टूबर को खरीदारी के लिए निकलने वाले लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। UPI सेवा बंद नहीं होगी। हालांकि, यदि कोई व्यापारी अपने संगठन के आह्वान के तहत उस दिन UPI स्वीकार नहीं करता है तो ग्राहक से नकद भुगतान करने के लिए कहा जा सकता है।
वहीं प्रस्तावित MDR व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है, इसलिए आने वाले दिनों में सरकार और व्यापारिक संगठनों के बीच बातचीत के आधार पर इसमें बदलाव होता है या नहीं, इस पर नजर रहेगी।
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