राजस्थान न्यूज 24 | राजसमंद
राजसमंद जिले की पंचायत समिति देलवाड़ के अंतर्गत आने वाली शिशवी की ढाणी में ग्राम पंचायत के पुनर्सीमांकन को लेकर विरोध तेज हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2025 में पुनर्सीमांकन प्रक्रिया के दौरान शिशवी की ढाणी को मूल ग्राम पंचायत शिशवी से हटाकर ग्राम पंचायत सोडावास में शामिल कर दिया गया। इस फैसले से नाराज ग्रामीणों ने 11 अक्टूबर 2026 को प्रदर्शन कर प्रशासन से पुनर्सीमांकन पर दोबारा विचार करने की मांग की। साथ ही, मांग पूरी नहीं होने पर सभी चुनावों के बहिष्कार की घोषणा की है।
ग्रामीणों का कहना है कि शिशवी की ढाणी मूल रूप से शिशवी गांव का हिस्सा है और उसका राजस्व संबंध भी शिशवी से जुड़ा हुआ है। ऐसे में उसे सोडावास ग्राम पंचायत में शामिल करना उचित नहीं है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूर्व व्यवस्था बहाल करते हुए शिशवी की ढाणी को वापस ग्राम पंचायत शिशवी में शामिल किया जाए।
शिशवी 400 मीटर, सोडावास करीब 2 किलोमीटर दूर
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे स्थानीय निवासी बलवन्त सिंह झाला ने बताया कि शिशवी की ढाणी और शिशवी गांव के बीच की दूरी अधिकतम 400 मीटर है, जबकि सोडावास गांव करीब 2 किलोमीटर दूर स्थित है।
ग्रामीणों के अनुसार, निकटतम गांव और मूल पंचायत से संबंध होने के बावजूद शिशवी की ढाणी को सोडावास ग्राम पंचायत में शामिल करने से स्थानीय लोगों को प्रशासनिक कार्यों में परेशानी हो सकती है। उनका कहना है कि ग्राम पंचायत से संबंधित कामों के लिए दूरी बढ़ने से ग्रामीणों को अतिरिक्त समय और संसाधन खर्च करने पड़ सकते हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि स्थानीय परिस्थितियों, दूरी और राजस्व संबंधी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए पुनर्सीमांकन के फैसले की समीक्षा की जाए।
विकास कार्य प्रभावित होने की जताई आशंका
बलवन्त सिंह झाला के अनुसार, यदि शिशवी की ढाणी को वापस ग्राम पंचायत शिशवी में शामिल नहीं किया गया तो गांव के विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर होने वाले कार्यों, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।
इसी मांग को लेकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पुनर्सीमांकन प्रक्रिया की समीक्षा कर पूर्व स्थिति बहाल करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांग पर उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे विरोध जारी रखेंगे।
पहले भी सांसद, विधायक और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई मांग
ग्रामीणों के अनुसार, शिशवी की ढाणी को वापस ग्राम पंचायत शिशवी में शामिल कराने के लिए पहले भी कई स्तरों पर प्रयास किए जा चुके हैं। ग्रामीणों ने अपने विरोध और मांग से संबंधित घटनाक्रम इस प्रकार बताया है:
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5 दिसंबर 2025: ग्रामीणों ने सांसद, राजसमंद को पत्र लिखकर पुनर्सीमांकन पर आपत्ति जताई।
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14 जनवरी 2026: नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ ने प्रभारी मंत्री ओटाराम देवासी को पत्र लिखकर पुनर्गठन रद्द करने और पूर्व स्थिति बहाल करने का अनुरोध किया।
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14 जनवरी 2026: ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने जयपुर स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम प्रतिवेदन सौंपा।
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11 अक्टूबर 2026: ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर जिला कलेक्टर को प्रतिवेदन सौंपा और पुनर्सीमांकन की समीक्षा की मांग दोहराई।
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर और उपखंड अधिकारी को भी अपनी मांग से अवगत कराने की बात कही है। हालांकि, इन अधिकारियों को पत्र सौंपने की तारीखों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों से किया जाना बाकी है।
मांग पूरी नहीं हुई तो चुनावों का करेंगे बहिष्कार
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि शिशवी की ढाणी को वापस ग्राम पंचायत शिशवी में शामिल करने की मांग पर उचित निर्णय नहीं लिया गया तो वे सभी चुनावों में भाग नहीं लेंगे और मतदान का बहिष्कार करेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांग प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। इसी कारण उन्होंने सामूहिक रूप से चुनाव बहिष्कार का निर्णय घोषित किया है।
प्रशासन के फैसले पर टिकी ग्रामीणों की नजर
शिशवी की ढाणी के पुनर्सीमांकन का मामला अब स्थानीय प्रशासन के समक्ष ग्रामीणों की प्रमुख मांग बन गया है। एक ओर ग्रामीण दूरी और मूल पंचायत से संबंध का हवाला देकर पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग कर रहे हैं, वहीं इस मामले में पुनर्सीमांकन से संबंधित आधिकारिक आदेशों और राजस्व अभिलेखों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन ग्रामीणों की आपत्तियों पर क्या निर्णय लेता है और शिशवी की ढाणी को वापस ग्राम पंचायत शिशवी में शामिल करने की मांग पर क्या कार्रवाई होती है।
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