उदयपुर। समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए काम करने वाले लोगों की प्रेरक कहानियों को देशभर तक पहुंचाने वाले ‘द सेवेज ह्यूमन्स’ के संस्थापक देवेश वर्मा और पलाश खंडेलवाल ने राष्ट्रीय स्तर पर उदयपुर का नाम गौरवान्वित किया है। गुजरात में आयोजित राष्ट्रीय चेंजमेकर्स मीट-2026 में देशभर से चयनित 51 चेंजमेकर्स में दोनों को शामिल किया गया।
इस राष्ट्रीय आयोजन में सामाजिक संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधियों, जमीनी स्तर पर बदलाव लाने वाले कार्यकर्ताओं, नवाचारकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रहे लोगों ने भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य ऐसे लोगों को एक मंच प्रदान करना था, जो अपने प्रयासों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला रहे हैं।
द चेंजमेकर्स नेटवर्क की इस पहल में डॉ. जिगर इनामदार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मंच के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों से आए चेंजमेकर्स ने अपने अनुभव साझा किए और एक-दूसरे के कार्यों से सीखने का अवसर प्राप्त किया।
4 हजार से अधिक प्रेरक कहानियों को पहुंचाया जन-जन तक
वर्ष 2019 में शुरू हुए द सेवेज ह्यूमन्स ने सोशल मीडिया को सामाजिक बदलाव की कहानियों को लोगों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनाया। देवेश वर्मा और पलाश खंडेलवाल की टीम अब तक 4 हजार से अधिक प्रेरक एवं सामाजिक बदलाव की कहानियों को सामने ला चुकी है। इसके डिजिटल मंचों से 10 लाख से अधिक लोगों की कम्युनिटी जुड़ी है और कंटेंट की मासिक पहुंच 10 करोड़ से अधिक बताई गई है।
कहानियों से सामाजिक बदलाव को मिलती है नई ताकत
राष्ट्रीय चेंजमेकर्स मीट में देवेश वर्मा और पलाश खंडेलवाल ने ‘कहानी कहने की शक्ति—सामाजिक प्रभाव से सामाजिक पहचान तक’ विषय पर विशेष सत्र लिया। उन्होंने बताया कि किसी सामाजिक कार्य की प्रभावी कहानी लोगों तक पहुंचने के साथ-साथ उसके लिए पहचान, सहयोग और नए अवसर भी पैदा कर सकती है।
उन्होंने चेंजमेकर्स को यह भी समझाया कि किसी प्रेरक कार्य को प्रभावशाली कहानी में किस तरह प्रस्तुत किया जाए, ताकि उसका संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे और सामाजिक प्रभाव कई गुना बढ़ सके।
राष्ट्रीय मंच पर हुआ सम्मान
कार्यक्रम के दौरान देवेश वर्मा और पलाश खंडेलवाल को उनके सामाजिक कहानी-कथन के कार्य के लिए सम्मानित भी किया गया। उन्हें जायडेक्स ग्रुप के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक डॉ. अजय रांका तथा गुजरात के पूर्व शिक्षा मंत्री भूपेंद्रसिंह चुडासमा ने सम्मान प्रदान किया।
देवेश और पलाश का मानना है कि एक प्रभावशाली कहानी केवल किसी व्यक्ति के कार्य को लोगों तक नहीं पहुंचाती, बल्कि सही लोगों तक पहुंचकर उसके प्रभाव को कई गुना बढ़ा सकती है।
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